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यहाँ रंग-गुलाल से नहीं बल्कि बिच्छू से खेलते हैं होली

Holi Special Saunthana Holi Scorpions

आप सभी जानते ही होंगे होली आने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में लोगों ने रंग-गुलाल खरीदने शुरू कर दिए हैं। सभी होली खेलने के लिए बेताब है। वैसे इन सभी के बीच आज हम आपको एक ऐसे गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ लोग बिच्छू से होली खेलने हैं। जी हाँ, जहाँ के बारे में हम बात कर रहे हैं वह उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िला में है। यहाँ एक ऐसा गांव है जहां होली के मौक़े पर बिच्छुओं की पूजा-अर्चना की जाती है और इनके साथ होली खेली जाती है। इस गाँव का नाम सैंथना है जहाँ लोगों को विश्वास है कि इस दिन बिच्छू उन्हें डंक नहीं मारते और वे बिच्छुओं के साथ अनोखे तरीक़े से होली मनाते हैं। 

एक वेबसाइट की रिपोर्ट को माना जाए तो होली के दिन के अलावा सभी दिनों पर बिच्छू का ज़हर इस गांव के लोगों को चढ़ता है। जी दरअसल ताखा तहसील क्षेत्र के सैंथना गांव के लोग होली के दिन, भैसान देवी के टीले पर चढ़ते हैं और टीले पर ही सैंकड़ों बिच्छू निकलते हैं। यहाँ बिच्छुओं के बच्चे, बड़े, बूढ़े हाथ पर लेकर घूमते हैं और इस दौरान बिच्छू भी आराम से लोगों के शरीर पर रेंगते हैं और लोग भी बेफ़िक्र रहते हैं। इस दौरान फाग के गीतों को बजाया जाता है और इस बीच बिच्छू के साथ खेलना चलता है। सब बड़े-बूढ़े फाग के लोक गीत गाते हैं और बाकी के लोग बिच्छु हाथ पर लेकर रखते हैं। 

ऐसे यहाँ होली मनाते हैं। कहा जाता है यहाँ होलिका दहन के बाद फाग मंडली भैसान देवी टीले पर पहुंचती है। भैसन देवी की पूजा-अर्चना के बाद पत्थरों को फूल मालायें चढ़ाई जाती है। वहीँ पत्थर हटाने के बाद ढेर सारे बिच्छू निकलते हैं। कई लोग यह मानते है कि फाग सुनकर बिच्छू बाहर निकलते हैं।

जब डेढ़ शाढे लोग काम करते हैं तो ऐसा ही होता है

 

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