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इस मंदिर को थपथपाने पर आती है डमरू की आवाज

history behind Jatoli Shiv Temple

हम सभी जानते ही हैं कि इस दुनिया में रहस्यों की कमी नहीं है. कई जगह है, कई मंदिर हैं, कई ऐसी चीजें हैं जिनमे कोई ना कोई रहस्य होता है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानने के बाद आपके होश उड़ जाएंगे. इस मंदिर का नाम है जटोली शिव मंदिर. यह मंदिर ऊंचाई में 111 फुट है. 

ऐसा दावा किया जाता है कि इस मंदिर की गिनती एशिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर में होती है. कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण जिस अंदाज में किया गया है वह देखने लायक है. मान्यता है कि पैराणिक काल में यहां भगवान शिव कुछ समय के लिए आकर रहे थे. इसी के साथ साल 1950 में स्वामी कृष्णानंद परमहंस नाम के एक साधु यहां आए और उनके दिशा-निर्देश पर जटोली शिव मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ.

वहीँ साल 1974 में मंदिर की नींव रखी गई, लेकिन, साल 1983 में उन्होंने समाधि ले ली. फिर भी मंदिर का काम चलता रहा. कहते हैं कि अगर मंदिर के बाहर से पत्थर को कोई भी थपथपाता है तो डमरू की आवाजा आती है. यह मंदिर देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं.

केवल यही नहीं बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने भी इस मंदिर को निर्माण करवाने में पैसे दिए थे. इस मंदिर को बनाने में 39 साल का समय लगा था और इस मंदिर के ऊपर 11 फुट ऊंचा एक विशाल सोने का कलश स्थापित है. वैसे यह मंदिर दिखने में बहुत आकर्षक है.

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