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इन्दौरी तड़का : अब ज़िंदगी में बस खाना,ऑफिस और सोना रे गया है  

indori tadka special

हाँ भिया ज़िंदगी तो ऐसी हो गई है कि अब खाना, ऑफिस और सोने के अलावा कुछ और रखा ही नी है।  बड़े कसम से सूबे एक तो जल्दी उठ जाओ उसके बाद ऑफिस के लिए भगो, वहां पे दिनभर साला काम काम काम और उसके बाद वहां से आओ तो खाना और फिर सो जाना इसके अलावा अब ज़िंदगी है ही नी।

 पूरी ज़िंदगी यई करने में निकली जा री है कुछ सम्पट ही नी पड़ रिया है की आखिर ये हो क्या रिया है।  गोल गोल घूमे जा रिए है सब जगे। ऑफिस घर ट्रैफिक, कहाँ सोना ऑफिस, ट्रेफिक खाना सोना मतलब क्या बोलू कसम से ऐसी बारा बजा दी है ना। बड़े अब तो ऐसा लगता है की इनके अलावा कुछ ज़िंदगी में है ही नी ले दे के सब यई है जो बी है।

 

बड़े ज़िंदगी में अब रे ही क्या गया है ऑफिस जाओ वहां जाके दिन भर काम में टंगे पड़े रओ, रस्ते में रओ तो ट्रफिक में गाली बकते रे जाओ, घर आओ तो घर पे वई लौकी की सब्जी खा लो और फिर वाई सदी सी कद्दू जैसी शक्ल लेके सो जाओ। मतलब क्या बोलो ऐसी हो री है ना ज़िंदगी की सम्पट ही नी पड़ रिया है की करना क्या है, हो क्या रिया है, अब तक क्या हुआ है, और हम चाते क्या है।

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