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गणेश चतुर्थी: जानिए आखिर कैसे हुआ था गणपति बप्पा का जन्म

GANESH CHTURTHI KATHA

आज गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व हर साल मनाया जाता है और आज से यानि 10 सितंबर से इस पर्व की शुरुआत हो गई है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं गणेश जी के जन्म की कथा जो आज के दिन जरूर पढ़नी या सुननी चाहिए।

गणेश जी के जन्म की कथा-

स्कंद पुराण में स्कंद अर्बुद खण्ड में भगवान गणेश के प्रादुर्भाव से जुड़ी कथा मौजूद है। इस कथा के अनुसार, भगवान शंकर द्वारा मां पार्वती को दिए गए पुत्र प्राप्ति के वरदान के बाद ही गणेशजी ने अर्बुद पर्वत (माउंट आबू, जिसे अर्बुदारण्य भी कहा जाता है) पर जन्म लिया था। इसी वजह से माउंट आबू को अर्धकाशी भी कहा जाता है। गणपति के जन्म के बाद देवी-देवताओं ने इस पर्वत की परिक्रमा की थी। इसके साथ ही साधु-संतों ने गोबर से वहां भगवान गणेश की प्रतिमा भी स्थापित की थी। आज इस मंदिर को सिद्धिगणेश के नाम से जाना जाता है।

एक अन्य कथा

वारहपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने गणेशजी को पंचतत्वों से बनाया है। इसके पीछे कथा यह है कि एकबार शिवजी गणेशजी को बना रहे थे तब देवताओं को खबर मिली की भगवान शिव अत्यंत रुपवान और विशिष्ट गणेशजी का निर्माण कर रहे हैं। इससे देवताओं को डर सताने लगा कि गणेशजी सबके आकर्षण का केंद्र बन जाएंगे। देवताओं को इस डर को शिवजी जान गए और उन्होंने विनायक के पेट को बड़ा कर दिया और मुख हाथी का लगा दिया।

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