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आखिर क्यों नोट पर लिखा रहता है 'मैं धारक को…रुपये अदा करने का वचन देता हूं'?

Facts about the Indian currency

भारत में करेंसी नोटों का इतिहास आप शायद ही जानते होंगे. वैसे इनमें समय-समय पर कई बदलाव हुए हैं. इस समय देश में 2000, 500, 200, 100, 50, 20, 10, 5, 2 और 1 रुपये के नोट प्रचलन में हैं. वहीँ इसके अलावा भारत में 1, 2, 5, 10, 20 रुपये के सिक्के भी प्रचलन में हैं जो आपके पास भी होंगे. वैसे करेंसी नोटों के बारे में बहुत सारी ऐसी बातें हैं, जो सामान्य लगती हैं, लेकिन हैं नहीं.  जी दरअसल नोटों में छिपी कई जानकारियां हैं जो गौर से देखने पर नजर आएंगी. ऐसे में असली और नकली नोट की पहचान भी आप चिन्हों के ज़रिये कर सकते हैं.

वैसे नोटों में लिखी जानकारियों में से एक है 'मैं धारक को...रुपये अदा करने का वचन देता हूं'. आप सभी ने इसे पढ़ा ज़रूर होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय करेंसी नोट पर ये क्यों लिखा होता है?

आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों?

जी दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 26 के अनुसार, बैंकनोट के मूल्य का भुगतान करने हेतु बैंक उत्तरदायी होता है. वहीँ जारीकर्ता होने के कारण मांग किए जाने पर ये भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा देय होता है. ऐसे में इस दौरान आरबीआई की तरफ़ से इस बात की गारंटी दी जाती है कि 100 रुपये के नोट के लिए धारक को 100 रुपये की देयता है. आप चाहे तो इसे एक तरह से नोटों के मूल्य के प्रति आरबीआई का वचन भी कह सकते हैं.

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