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आपने कभी नहीं सुनी होगी छठ पर्व मनाने की ये वजह

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलने वाले छठ पर्व का सबसे अहम महत्व होता है. छठ पर्व को केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम धर्म के लोग भी मनाते हैं. जी दरअसल इस त्यौहार को बिहार और उत्तर प्रदेश में ख़ास तौर से मनाया जाता है. इस पर्व को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. आप सभी को बता दें कि इस पर्व के पहले दिन की शुरुआत छठ पूजा और नहाय खाय के साथ होती है. वहीं इसके बाद दूसरे दिन खरना और सूरज को अर्घ्य दिया जाता है. वहीं अंत में यानी आख़िरी दिन सूर्य को सुबह अर्ध्य देने के साथ ये त्यौहार संपन्न होता है. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं छठ पर्व की वो कहानी जो बहुत कम लोग जानते हैं.

कहानी

यह कहानी भगवान राम की अयोध्या वापसी से जुड़ी है, जब वो विजयादशमी के दिन लंकापति रावण का वध करने के बाद अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने ऋषि-मुनियों से सलाह ली. इसके बाद रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए राजसूर्य यज्ञ किया. कहा जाता है इस यज्ञ को करने के लिए मुग्दल ऋषि को अयोध्या बुलाया गया, जिन्होंने माता सीता को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने को कहा. उस समय मुग्दल ऋषि के आदेश का पालन करते हुए सीता जी ने उनके आश्रम में 6 दिन कर कर सूर्यदेव भगवान की पूजा की. उसी के बाद से छठ पर्व की शुरुआत हो गई.

एक अन्य कहानी

ब्रह्मा की मानसपुत्री देवसेना ही षष्‍ठी देवी हैं, जिन्हें स्‍थानीय बोली में छठ मइया कहा जाता है. कहा जाता है इनकी पूजा-अर्चना करने से नि:संतानों को संतान की प्राप्ति होती है. इस वजह नवजात शिशु के जन्म के 6 दिन बाद छठी की जाती है.

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