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नवरात्रि के दूसरे दिन जानिए माता ब्रह्मचारिणी की कथा

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नवरात्रि आरम्भ हो चुकी है। ऐसे में कल यानी 18 अक्टूबर को नवरात्रि का दूसरा दिन है और दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित माना जाता है। आप सभी जानते ही होंगे नवरात्रि के नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों का पूजन करने से बड़े लाभ होते हैं। वैसे कहा जाता है इनमे पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों [कुमार, पार्वती और काली], अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते हैं। आप सभी को बता दें कि नवरात्रि के नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है उनका नाम पहला शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्माचारिणी, तीसरा चन्द्रघन्टा, चौथा कूष्माण्डा, पांचवा स्कन्द माता, छठा कात्यायिनी, सातवां कालरात्रि, आठवां महागौरी, नौवां सिद्धिदात्री है। अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं माता ब्रह्मचारिणी की कथा। आइए जानते हैं। 

माता ब्रह्मचारिणी की कथा

माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्‍‌नी बनी।

जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है।

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