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इस वजह से भोले बाबा को चढ़ती है बेलपत्र

Bholenath Bel Patra Story

सावन के महीने में भोले बाबा का बहुत ही धूम-धाम से पूजन करते हैं. कहा जाता है सावन के महीने में भोलेनाथ का पूजन करने से बड़े-बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है. वैसे सावन के महीने में भोले बाबा को बेलपत्र चढ़ाने के भी अपने ही फायदे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों चढ़ती है भोले बाबा को बेलपत्र? क्या है इसके पीछे का लॉजिक? आइए आज हम आपको बताते हैं इसके पीछे की कहानी..

आखिर क्यों चढ़ती है भोले बाबा को बेलपत्र

जब समुद्र मंथन के बाद विष निकला तो भगवान शिव ने पूरी सृष्टि को बचाने के लिए ही इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और उनका पूरा शरीर अत्यधिक गरम हो गया जिसकी वजह से आसपास का वातावरण भी जलने लगा. चूंकि बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करता है इसलिए सभी देवी देवताओं ने बेलपत्र शिवजी को खिलाना शुरू कर दिया. बेलपत्र के साथ साथ शिव को शीतल रखने के लिए उन पर जल भी अर्पित किया गया. बेलपत्र और जल के प्रभाव से भोलेनाथ के शरीर में उत्पन्न गर्मी शांत होने लगी और तभी से शिवजी पर जल और बेलपत्र चढ़ाने की प्रथा चल पड़ी.

ध्यान रहे

शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों वाला ही बेलपत्र चढ़ाएं. ध्यान रहे बेलपत्र को अर्पित करने से पहले अच्छे से धोकर ही इस्तेमाल करें. इसी के साथ जब भी भोलेशंकर को बेलपत्र चढ़ाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि बेलपत्र चढ़ाने के बाद जल जरूर अर्पण करें. वहीँ बेलपत्र चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप भी करें. 

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