Trending Topics

भारतीय मिठाई नहीं है गुलाब-जामुन, जानिए कैसे पड़ा इसका नाम?

 The untold story of Gulab Jamun

 गुलाब जामुन (Gulab Jamun) एक ऐसी डिश है जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. यह खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, इसका इतिहास भी उतना ही मीठा और चटपटा है. आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं. जी दरअसल गुलाब जामुन एक पर्शियन डिश है, जो पर्शिया (ईरान) में अलग तरीके से बनाई जाती है. जी हाँ, वैसे आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि आख़िर 'गुलाब जामुन' को गुलाब जामुन ही क्यों कहा जाता है? जबकि इसमें न तो 'गुलाब के फूल' का इस्तेमाल किया जाता है और न ही इसमें 'जामुन का रस' मिलाया जाता है. अगर हाँ तो आज जान लीजिये इसका जवाब.

इतिहासकार माइकल क्रांजल की माने तो 13वीं सदी के आसपास पर्शिया (ईरान) में 'गुलाब जामुन' की शुरुआत हुई थी. कहा जाता है ईरान में 'गुलाब जामुन' की तरह ही एक मिठाई तैयार की जाती है, जिसे 'लुक्मत अल-क़ादी' कहा जाता है. वहीं 'गुलाब जामुन' में गुलाब दो शब्दों से मिलकर बना है 'गुल' और 'आब'. इसमें 'गुल' का मतलब 'फूल' से है और 'आब' का मतलब 'पानी' से है. वहीं 'जामुन' के आकार की तरह दिखने की वजह से इसे 'गुलाब जामुन' नाम दिया गया. पर्शिया (ईरान) में गुलाब जामुन (लुक्मत अल-क़ादी) डिश बनाने के लिए सबसे पहले मैदे से बनी गोलियों को घी में डीप फ़्राई किया जाता है और इसके बाद इन्हें शहद या शक्कर की चाशनी में डुबोया जाता है.

इस बीच इस मीठे पानी (चासनी) को बनाने के लिए उसमें ग़ुलाब के फूलों की सूखी पंखुड़ियों को तोड़कर डाला जाता है. इस वजह से इसे 'गुलाब रस' भी नाम दिया गया है. कहते हैं कि पर्शिया (ईरान) के बाद ये मिठाई टर्की में भी तैयार की जाने लगी. बाद में टर्की के लोग इसे भारत लेकर आये और ये 'लुक्मत अल-क़ादी' से 'गुलाब जामुन' बन गई. 

क्या आप जानते हैं तांबे के बर्तन में खाने-पीने के नुकसान

आखिर क्यों CNG भरवाने से पहले आपको गाड़ी से उतरना पड़ता है?

 

You may be also interested

Recent Stories

1