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बीमार पड़ जाते हैं भगवान जगन्नाथ, 14​ दिन रहना पड़ता हैं क्वारंटीन

Why Lord Jagannath in quarantine for 14 Days how did they get sick before rath yatra 2022 Self isolation

ओडिशा के पुरी में विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा (Rathyatra) हर साल निकाली जाती है. जी हाँ और जल्द ही यह रथयात्रा शुरू होने वाली है. आपको बता दें कि बीते मंगलवार को 108 घड़े पानी से स्नान करने के एक दिन बाद बीते बुधवार को भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ (Bhagwan Jagannath) अपने मंदिर में ही रहे, क्योंकि परंपरा के अनुसार वे बीमार पड़ जाते हैं, जी हाँ और तीनों एक पखवाड़े तक एकांत में रहते हैं. जी हाँ, और यहाँ दैतापति सेवकों को छोड़ किसी को भी मंदिरों के अंदर जाने की अनुमति नहीं है, जहां भगवान बीमार पड़ने के बाद विश्राम करते हैं. जी दरअसल भगवान जगन्नाथ, भगवान बालभद्र और देवी सुभद्रा को बीमार पड़ने पर अनासर घर नामक कमरे में एकांत में रखा गया है. यहाँ महल के राज वैद्य के निर्देश पर उनका इलाज जड़ी-बूटियों, फूलों और जड़ के अर्क से किया जा रहा है. 

जी दरअसल ऐसा कहा जाता है कि तीनों देवी-देवताओं का ठीक उसी तरह से उपचार किया जाता है, जैसा किसी मनुष्य का बीमार पड़ने पर किया जाता है. जी हाँ और यहाँ भगवान भी ‘अनासर घर’ में 14 दिनों तक क्वारंटीन यानी पृथकवास में रहते हैं. आप  सभी को याद होगा जब कोरोना महामारी की शुरुआत में 14 दिन के क्वारंटीन यानी सेल्फ आइसोलेशन का नियम बनाया गया था, तब लोगों ने आश्चर्य किया था कि क्वारंटीन के लिए 14 दिन ही क्यों तय किए गए. वहीं बाद में डॉक्टर और विशेषज्ञों ने बताया था कि कैसे संक्रामक बीमारियों का चक्र तोड़ना जरूरी होता है और इसके लिए 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड अहम है.

आपको बता दें कि क्वारंटीन यानी पृथक-वास का अर्थ है संक्रमित की आवाजाही को प्रतिबंधित करना ताकि संक्रमण दूसरों में न फैले. ऐसा कहा जाता है कि भगवान ने भी इन नियमों का पालन किया था, ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है. जी दरअसल जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता का कहना है, भगवान जगन्नाथ मंदिर में यह प्रथा प्राचीन काल से प्रचलित है. उन्होंने कहा, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ओडिशा सरकार ने भी कोविड मानदंडों का पालन करने के लिए इस धार्मिक परंपरा का उल्लेख किया था कि किस तरह से वार्षिक रथयात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ स्वयं को क्वारंटीन रूम यानी पृथक-वास कक्ष में अलग कर लेते हैं. इस क्वारंटीन रूम को अनासर घर कहा जाता है.

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