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क्या आप जानते हैं पानी पूरी का इतिहास

who made panipuri first

गोलगप्पे, पानीपूरी, पुचका, बताशे. का नाम सुनते ही हम सभी के मुंह में पानी आ जाता है. इसे खाने के लिए हम कही भी जा सकते हैं . वैसे आप जो गोलगप्पे खाते हैं कभी उसका इतिहास जानने की कोशिश की है. शायद नहीं लेकिन आज हम आपको उसका इतिहास बताने जा रहे हैं. आइए बताते हैं.

कहा जाता है पानीपूरी की खोज की कहानी महाभारत से जुड़ी है. यह उस समय की बात है जब पांडव वनवास काट रहे थे. उस समय उन्हें बहुत कम ही संसाधनों के साथ गुज़र-बसर करना होता था. उसी दौरान कुंती माता ने अपनी नववधू द्रौपदी की परीक्षा लेनी चाही. ऐसे में उन्होंने द्रौपदी को बची हुई आलू की सब्ज़ी और एक पूरी का आटा दिया और कहा कि कुछ ऐसा बनाओ की जिससे पांचों पुत्रों की भूख शांत हो जाए. यह देखकर द्रौपदी ने पानी पूरी तैयार की और सबको खिलाई. उनके द्वारा बनाई गई यह पानी पूरी सभी को बहुत पसंद आई और उसी के बाद से यह सभी के खाने का हिस्सा बन गया.

कहा तो यह भी जाता है कि गोलगप्पे की खोज भारत में 120-130 साल पहले हुई थी. जी दरअसल इसकी खोज बिहार या उत्तर प्रदेश में हुई थी. कहा जाता है इसका आविष्कार राज कचौरी को देख कर किया गया था. सबसे पहले किसी ने छोटी सी पूरी बनाकर खाई और इसी को गोलगप्पा कहा जाने लगा.

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