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आखिर क्यों मनाते हैं छठ पर्व, जानिए लॉजिक?

WHY HINDU CELEBRATE CHHATH

आज से नहाय-खाय के साथ छठ पर्व की शुरुआत हो गई है। आप सभी को आज हम बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों मनाते हैं छठ पर्व, इसे मनाने के पीछे का लॉजिक?
 

क्या है छठ पर्व मनाने के पीछे की वजह

जी दरअसल पुराण में छठ पूजा के पीछे की एक कहानी है जो हम आपको बताने जा रहे हैं. यह कहानी राजा प्रियंवद को लेकर है। कहा जाया है राजा प्रियंवद को कोई संतान नहीं थी तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं। उन्होंने राजा को उनकी पूजा करने और दूसरों को पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा।

राजा प्रियंवद ने पुत्र इच्छा के कारण देवी षष्ठी की व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। कहते हैं ये पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी और तभी से छठ पूजा होती है। इस कथा के अलावा एक कथा राम-सीता जी से भी जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब राम-सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया। पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया । मुग्दल ऋषि ने मां सीता पर गंगा जल छिड़क कर पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। जिसे सीता जी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।

केवल यही नहीं बल्कि एक मान्यता यह भी है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। कहा जाता है इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी। वह भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वह हर दिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। वहीँ भगवान सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने थे।

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